
तेहरान/यरूशलम – दुनिया एक बार फिर युद्ध की दहलीज़ पर खड़ी है। सोमवार तड़के इजरायल ने ईरान के कई बड़े शहरों पर मिसाइल हमले किए, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव की लहर दौड़ गई है। ये हमले इतनी तीव्रता और सटीकता के साथ किए गए कि कुछ ही घंटों में ईरान के तीन प्रमुख शहर – तेहरान, इस्फहान और शीराज़ – थर्रा उठे।
कैसे हुआ हमला?
स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 3:15 बजे, ईरान के रडार सिस्टम्स पर अज्ञात उड़न वस्तुओं की पहचान हुई। शुरू में लगा कि ये ड्रोन्स हो सकते हैं, लेकिन चंद मिनटों में सटीक गाइडेड मिसाइलें विभिन्न ठिकानों पर गिरने लगीं। पहला बड़ा धमाका तेहरान के बाहरी इलाके में एक मिलिट्री वेयरहाउस में हुआ, इसके बाद इस्फहान के पास स्थित एक संदिग्ध परमाणु सुविधा पर भीषण हमला हुआ।
ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी IRNA के अनुसार, हमलों में अब तक 94 नागरिकों की मौत हो चुकी है और 250 से ज्यादा घायल हैं। कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गई हैं।
इजरायल का दावा: यह आत्मरक्षा है
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आधिकारिक बयान में कहा:
“ईरान की आक्रामक नीति, उसके परमाणु हथियारों की महत्वाकांक्षा, और हाल के ड्रोन हमले इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके थे। यह हमला हमारी आत्मरक्षा की नीति का हिस्सा है।”
इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) के प्रवक्ता के अनुसार, यह “अप्रत्याशित लेकिन सीमित” कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था – खासकर उसके ड्रोन और मिसाइल बेस।
ईरान की चेतावनी: यह युद्ध की शुरुआत है
दूसरी ओर, ईरान ने इसे ‘युद्ध की घोषणा’ बताया है। ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई ने कहा:
“इजरायल ने जो किया है, वह उसके अस्तित्व को खतरे में डाल देगा। हम इसका जवाब ज़रूर देंगे – और ऐसा जवाब जो पूरी दुनिया याद रखे।”
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) को “पूर्ण युद्ध की तैयारी” के आदेश दे दिए गए हैं। कई सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
क्यों भड़की यह लड़ाई? – पृष्ठभूमि
इस संघर्ष की नींव बहुत पुरानी है। इजरायल और ईरान दशकों से एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे हैं। हाल के वर्षों में ईरान ने सीरिया, लेबनान और यमन में अपने समर्थक गुटों के ज़रिए इजरायल के खिलाफ हमले तेज़ किए हैं।
पिछले हफ्ते, इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर एक ड्रोन हमला हुआ था, जिसके पीछे इजरायल ने ईरान समर्थित हिजबुल्ला का हाथ बताया। इसके बाद IDF ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आया, तो ‘सर्जिकल स्ट्राइक से भी ज्यादा’ किया जाएगा।
इसी दौरान, खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अपनी परमाणु सुविधा फोर्दो में संवेदनशील गतिविधियाँ फिर शुरू कर दी थीं – जिससे इजरायल की बेचैनी और बढ़ गई।
दुनिया का क्या रुख है?
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक आपात बैठक बुलाई है और तुरंत युद्धविराम की अपील की है। अमेरिका ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, और किसी पक्ष का सीधा समर्थन नहीं कर रहे।”
हालांकि, अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने यह ज़रूर कहा है कि “इजरायल को आत्मरक्षा का अधिकार है।” यह बयान खुद में काफी कुछ कह जाता है।
रूस और चीन ने इजरायल के हमलों की निंदा की है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। भारत ने भी बयान जारी कर दोनों देशों से बातचीत के ज़रिए हल निकालने की सलाह दी है।
जनता पर असर: रोते बच्चे, तबाह घर
तेहरान से एक वायरल वीडियो में एक मां अपने जले हुए मकान के सामने अपने तीन बच्चों को ढूंढ़ती दिखाई दे रही है। सड़कें खून से रंगी हुई हैं, अस्पतालों में जगह नहीं है और मस्जिदों में लाशों की कतारें लग चुकी हैं।
एक चश्मदीद के अनुसार –
“मैं सो रहा था, तभी जोर का धमाका हुआ। हमारी बिल्डिंग हिल गई। जब बाहर निकले तो हर तरफ आग थी और लोग चिल्ला रहे थे।”
क्या होगा अब? – आने वाले खतरे
इस हमले के बाद सबसे बड़ा खतरा ये है कि यह क्षेत्रीय संघर्ष विश्व युद्ध में तब्दील हो सकता है। अगर ईरान जवाबी हमला करता है – खासकर तेल अवीव या हैफा जैसे शहरों पर – तो इजरायल की प्रतिक्रिया और भी उग्र हो सकती है।
इसके अलावा, ईरान के सहयोगी गुट जैसे हिजबुल्ला (लेबनान), हौथी (यमन) और शिया मिलिशिया (इराक) इस लड़ाई में शामिल हो सकते हैं – जिससे इज़रायल चारों तरफ से घिर सकता है।
निष्कर्ष: युद्ध या समाधान?
मध्य पूर्व पहले ही अशांति और आतंक से जूझता रहा है। अब इजरायल और ईरान के बीच खुला युद्ध न केवल इस क्षेत्र, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता को हिला सकता है।
यह समय है जब विश्व शक्तियों को आगे आकर युद्ध को टालने और शांति की राह अपनाने की कोशिश करनी चाहिए – वरना आग में सिर्फ इजरायल और ईरान ही नहीं, पूरी दुनिया झुलसेगी।


